दिल से.............

फुर्सत नही अब काम से हम दोस्त क्या बनायेंगे

मिलना भी हो जाएगा गर कभी राह मे मिल जायेंगे

 

मिल के ना हांसिल होगा उन्हें कुछ ना हमही कुछ पाएंगे

बस गीली ऑंखें लिए फिर से दोनों जुदा हो जायेंगे

 

हम भीकभी याद आयेंगे वो भी कभी रुलाएं

दो-चार ज़स्ब दरमियाँ अगर कहीं रेह जायेंगे

 

ये पुख्ता सलाखें वक्त की रिहा होने देगी नही

हर लम्हा अब काश! काश! कर के हम बिताएंगे

 

दिन गुज़ारा किए हम जिनका तसवुर लिए

शब् तलक वो नुरानी चेहरे चाँद से हो जायेंगे

 

 

अक्सर वो ही बातें बा_रहां दोहराईं हैं मैंने
मिटा
मिटा कर तेरी तस्वीरें बनाईं है मैंने

जिस
हंसीं फरेब से ता_उम्र तौबा किया था
फिर वो ही गज़लें आज महफिल मे गाईं हैं मैंने

मेरी आँखों के अब कोई सागर ना लुटे

बहुत
टूट हूँ तब ये नदियाँ बहाईं है मैंने

मेरी आदत में नही था यारों दर्द रोना
बहुत बेबस में ये मजबूरियाँ सुनाई है


मैंने
मुद्दतों बाद फिर हँसते देखा है उनको
उनकी तकलीफें आज ख़ुदा को बातईं है मैंने

फिर जीने की दिल को हसरत सी हुई है

एक
बार फिर कमजोरियाँ जताईं है मैंने

पागल सी एक लड़की है
हर पल वो मुझको तकती है
आंख में उसकी मस्ती है
वो बात-बात पर हंसती है
हर रोज वो रूप बदलती है
हर रूप में अच्छी लगती है
इस दिल में आग भड़काती है
जब मेरी तरफ वो बढ़ती है
दीदार को आंख तरस्ती है
फुर्सत में आंख बरसती है
वो जब भी मुझसे मिलती है
ये जालिम दुनिया जलती है
प्यार वो मुझसे करती है
इजहार से लेकिन डरती है

मुझे अपने प्यार की पनाहों में रखना............

एक हंसीन ख्वाब बना कर तुम
मुझे हर पल अपनी निगाहों में रखना
छू ना सके मुझे ये हवाऐं बहकी सी
मुझे कैद अपनी पनाहों में रखना
मैं खाक हूं बिखर ना जाऊं कहीं
मुझे समेट कर अपनी बाहों में रखना
जो करो तुम मोहब्बत हदों से गुजर कर
मेरा नाम तुम अपनी खताओं में रखना
मैं करता हूं अहसास तुम्हारा
तुम भी मुझे याद अपनी दुआओं में करना
कभी जुदा ना करे गर्दिशे जमाना
मुझे अपने प्यार की पनाहों में रखना

तनहा अब जीते हैं..............

वक्त बगावत करने लगे,
दोस्त आज दुश्मन बनने लगे।
जिसे हम अपना समझते थे,
वो भी दूर मुझसे रहने लगे।
दुश्मन भी अब हंसने लगे,
दोस्त भी दूर हटकर रहने लगे।
काश हमारा दिल ही बताए,
कौन मेरा जो दिल लौटाए।
वक्त ने मारा तुम न मारो,
उम्मीदों का मुझसे तुम बौछार करो।
मुझे दर्द मेरा दोस्त खफा,
हम घूंट-घूंट कर जीने लगे।
तनहा अब जीते हैं,
दुनियां के हम गम पीने लगे।
लोग हमसे अब कहने लगे,
दोस्त क्यों खफा तुमसे रहने लगे।
दुनियां वाले मुझपे बरसने लगे,
संकट के बादल अब गरजने लगे।
क्या कहूं तुझे. ख्वाब कहूं तो टूट जाएगा,


दिल कहूं तो बिखर जाएगा,


या तेरा नाम जिंदगी रख दूं,


मौत से पहले तो तेरा साथ छूट नहीं पाएगा।

क्या कहूं तुझे.......

बिखरती जुल्फों के जब............

बिखरती जुल्फों के जब पहरे हो जाते हैं
क़ायनात के सारे फूल तेरे चेहरे हो जाते हैं

अंगूठे से यूँ ज़मीं को कुरेदा ना करो
ज़ख्म दिल के हरे हो जाते हैं

नीची निगाहों से दिल पे ना करो चोट
जज्बात मेरे और गहरे हो जाते हैं

सुना है- इश्क़ में पड़ते हैं जब दो दिल
सारे लम्हात सुनहरे हो जाते हैं

लेकर हाथों में वो आईना ............

लेकर हाथों में वो आईना पूछते हैं
मुझसे मेरी ज़िंदगी का मायना पूछते हैं

रोशनी अपने हिस्से की उन्हें दे चुका
फिर भी किसे कहते हैं चाहना- पूछते हैं

इस मासूमियत को आखिर क्या कहिए
क्यूँ भूल गया हूँ मैं हँसना, पूछते हैं

जिन लबों ने कभी आने को कहा नहीं
उन्ही लबों से, तुम आए क्यूँ ना- पूछते हैं

यूँ के जैसे मुझे पहचानते ही नहीं
कब से हो तुम मेरे आशना पूछते हैं

उफ्फ़! ये अदा, ये शोखी, ये अना
क्या है तेरी ज़िंदगी मेरे बिना, पूछते हैं

कहने को कह गए कई .................

कहने को कह गए कई बात ख़ामोशी से
कटते-कटते कट ही गई रात ख़ामोशी से

न शोर-ए-हवा, न आवाज़-ए-बर्क़ कोई
निगाहों में अपनी हर दिन बरसात ख़ामोशी से

शायद तुम्हें ख़बर न हो लेकिन यूँ भी
बयाँ होते हैं कई जज्बात ख़ामोशी से

दिल की दुनिया भी कितनी ख़ामोश दुनिया है
किसी शाम हो गई इक वारदात ख़ामोशी से

माईले-सफर हूँ, बुझा-बुझा तन्हा-तन्हा
पहलू में लिए दर्द की कायनात ख़ामोशी से

मुट्ठी में रेत उठाये चला था जैसे मैं
आहिस्ता-आहिस्ता सरकती गई हयात ख़ामोशी से

आँख उनसे मिली तो सजल हो गई..............

आँख उनसे मिली तो सजल हो गई
प्यार बढ़ने लगा तो ग़ज़ल हो गई

रोज़ कहते हैं आऊँगा आते नहीं
उनके आने की सुनके विकल हो गई

ख़्वाब में वो जब मेरे करीब आ गये
ख़्वाब में छू लिया तो कँवल हो गई

फिर मोहब्बत की तोहमत मुझ पै लगी
मुझको ऐसा लगा बेदख़ल हो गई

वक्त का आईना है लबों के सिफ़र
लब पै मैं आई तो गंगाजल हो गई

'Rahul' की शाइरी किसी का दिल हो गई
ख़ुशबुओं से तर हर्फ़ फ़सल हो गई

तुम्हारे प्यार में...........

 

तुम्हारे प्यार में हमने बहूत चोट खाए ,
जिसका हिसाब न होसके उतने दर्द पाए ,
फिर भी तेरे प्यार की कसम खाके कहता हूँ ,
हमारे लब पे तुम्हारे लिए सिर्फ़ प्यार आए ...

तुम्हारे ग़ज़ल दिल के बहुत ही पास हैं
हर दिल कह रहा है ये मेरा अहसास है
दो लफ्ज़ मैं कह दूँ इस गीत की कहानी
प्यार ही ज़मीन है प्यार हीं आकाश है

 

तेरी यादों के सहारे ........

तेरी यादों के सहारे जी लिया करते हैं,
खाकर चोट भी दिल पर हंस दिया करते हैं.
हमें गम नही तेरी बेवफ़ाई का,
हम तो बस यूँ ही रो दिया करते हैं.
तेरी कातिल निगाहों का ही कमाल है ये,
कि औरों से हम आँखें चुरा लिया करते हैं.
हाल है मेरा गली के उस पत्थर कि तरह,
जिसे सब लोग ठोकर मार दिया करते हैं
तेरी यादों के सहारे जी लिया करते हैं,
खाकर चोट भी दिल पर हंस दिया करते हैं.

जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर
कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर

अब सोचते हैं मौत में ही चैन पायेंगे
कुछ मार ज़िंदगी ने यूँ ड़ाला है यहाँ पर

दम घुट रहा था मेरा अंधेरों में प्यार के
दिल में ग़मों का ही तो उजाला है यहाँ पर

मरने के इंतेज़ार में जीते हैं देखिये
कैसा ग़ज़ब ये खेल निराला है यहाँ पर

बस याद कर रहा हूँ मै जलवा-ए-यार को
बे-बादा मस्तियों को यूं पाला है यहाँ पर

ऐ नाख़ुदा तू साहिलों से दूर रख मुझे
हर शख़्स वहाँ ड़ूबने वाला है यहाँ पर

इतना नहीं था लाल ये रंगेहिना कभी
मसल किसी का दिल कहीं ड़ाला है यहाँ पर

ना चाँद ही ड़ूबा कहीं ना ही हुई है रात
‘rahul’ तेरा ही दिल है जो काला है यहाँ पर

ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह
बिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरह

मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रही है गर्दिश
के जैसे मै हूँ शिकारी के निशाने की तरह

के रात रात न हो, कोई चिता हो जैसे
के जैसे ख़्वाब हों जलने के बहाने की तरह

मै कोई संग न था मै तो एक शीशा था
पटक दिया मुझे पत्थर पे ज़माने की तरह

ये वहम ये ख़लिश ये वफ़ा-मिजाज़ ज़ेहन
इन्होने कर दिया ‘rahul’ को दीवाने की तरह

चाँद दर्द का जला,

दिल में उतरी चाँदनी
तन्हाई ही छोड़ गई,

जहाँ पे बिखरी चाँदनीढ़ूंढ़ता ही रह गया सहर,

 

शफ़क, शमा, सुकून
अंधियारा ही हाथ लगा

ऐसी गुज़री चाँदनीयूँ तो मेरी मय्यत पर

 

सूरज भी रोने आया था
इसको ही बस इल्म नहीं,

कुछ ना समझी चाँदनीवो दामन नहीं गरेबाँ था

 

जो फ़टा सा हाथ में आया था
हर एक ताना तोड़ गई

कुछ ऐसी अखरी चाँदनी

दिल में अजब से ख़यालात हैं
आज उनसे पहली मुलाक़ात है

ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें
लगा दिन में जैसे हुई रात है

शमा जो जली संग पतंगे जले
अब अपने भी ऐसे ही हालात हैं

दानिश थे जितने वो नादाँ हुए
अदाओं में उनकी कोई बात है

वो लहराया आँचल ज़रा देखिये
सितारों की धरती पे बरसात है

जो नज़रें झुकीं फ़ज़ा रुक गई
उसके भी मुझ से ही जज़्बात हैं

वो चुप भी रहे और कह भी गये
उलझे सभी अब सवालात हैं

मुझे देखकर वो तो शरमा गये
हुई आज कैसी इनायात हैं

जिये जा रहे हैं तेरी चाह में
मोहब्बत की ये ही रवायात हैं

अभी से यूँ बेबाक ना तुम बनो
अभी तो मोहब्बत की शुरुआत है

मै मुल्ज़िम के जैसे हुआ क़ैद हूँ
वो आँखें तो जैसे हवालात है

सुर्ख़ आरिज़ हुए वस्ल की बात पर
रुखों पे चमकते जवाबात है

इजाज़त ज़रा दें तो कह दूँ उन्हे
दिल में छुपे जो पैग़ामात है

 

उसकी गली में यारों आज उससे सामना है
कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है

पहले तो इस जहाँ ने हँसना बनाया मुश्किल
रोने भी अब ना देंगे के ये भी तो अब मना है

किसको बताऊँ मुजरिम किस पर करूँ मुकदमा
हर हाथ में है खंजर जो खून से सना है

अश्क़ों की झील में ये कश्ती मेरी फ़ँसी है
मेरे ग़म की वादियों में कोहरा बड़ा घना है

 


सता लें हमको, दिलचस्पी जो है उनकी सताने में
हमारा क्या वो हो जाएंगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में

लड़ाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजा
नतीजा चाहे जो कुछ हो मुक़द्दर आज़माने में

जिसे भी देखिए है गर्दिशे हालात से नाला
सुकूने दिल नहीं हासिल किसी को इस ज़माने में

वो गुलचीं हो कि बिजली सबकी आखों में खटकते हैं
यही दो चार तिनके जो हैं मेरे आशियाने में

है कुछ लोगों की ख़सलत नौए इंसां की दिल आज़ारी
मज़ा मिलता है उनको दूसरों का दिल दुखाने में

अजब दस्तूर—ए—दुनिया— ए —मोहब्बत है , अरे तौबा
कोई रोने में है मश़ग़ूल कोई मुस्कुराने में

पतंगों को जला कर शमए—महफिल सबको ऐ 'बर्क़ी'!
दिखाने के लिए मसरूफ़ है आँसू बहाने में.

 

नहीं है उसको मेरे रंजो ग़म का अंदाज़ा
बिखर न जाए मेरी ज़िंदगी का शीराज़ा

अमीरे शहर बनाया था जिस सितमगर को
उसी ने बंद किया मेरे घर का दरवाज़ा

सितम शआरी में उसका नहीं कोई हमसर
सितम शआरों में वह है बुलंद आवाज़ा

गुज़र रही है जो मुझपर किसी को क्या मालूम
जो ज़ख़्म उसने दिए थे हैं आज तक ताज़ा

गुरेज़ करते हैं सब उसकी मेज़बानी से
भुगत रहा है वो अपने किए का ख़मियाज़ा

है तंग का़फिया इस बहर में ग़ज़ल के लिए
दिखाता वरना में ज़ोरे क़लम का अंदाज़ा

वो सुर्ख़रू नज़र आता है इस लिए 'बर्क़ी'!
है उसके चेहरे का, ख़ूने जिगर मेरा, ग़ाज़ा

बस एक वक्त का खंजर मेरी तलाश में है,
जो रोज़ भेष बदल कर मेरी तलाश में है।

मैं एक कतरा हूं मेरा अलग वजूद तो है,
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है ।

मैं देवता की तरह कैद अपने मन्दिर में,
वो मेरे जिस्म के बाहर मेरी तलाश में है।

जिसके हाथ में एक फूल देके आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है।

पलकों की चौखट पे बैठा, किस को निहारा करता है
यादों की चादर से लिपटा ज़ख्म उभारा करता है

अब्र में देखो आब नही है, दरिया जलता रहता है
सब्र के कंधों पर सर रख कर उम्र गुज़ारा करता है

माजी के हांथों से सदियाँ तारीख़ सवार करती है
छोड़ के अब जागीर'ऐ वफ़ा वो गम से गुज़ारा करता है

सहेर सहेर ढूंढ चुका वो दरिया दरिया टो आया
ख़ुद ही जुदा हो कर हमसे हमको पुकारा करता ह

वक्त की सोहबत मे रेह कर वो वक्त सरीखा लगता है
आँखों मे उम्मीदें धर कर पल पल मारा करता है

साहिल'ऐ खवाहिश दूर खड़ा है,बाँहों मे अब ज़ोर नही
जाने कौन मसीहा है जो मुझको उबारा करता है

 

 

थाम के हाथ मेरा जिन्दगी भर साथ चले ,
जैसे चाँद के संग चांदनी हर रात चले !
लगे हर रोज सुबह मुझको वो पगली सी,
बने जो मेरी दीवानी हर शाम ढले !

करे मुझ से ही शिकायत मेरी शेतानी पे,
रूठे खुद से खुद की नादानी पे !
हँस के करदे रोशन मेरे दिल का हर कोना,
रहे बेचेन मेरी एक परेशानी पे !
काटू जिंदगी उसकी पलको के तले !

थाम के हाथ मेरा जिन्दगी भर साथ चले !


एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

है नादाँ सी कभी कभी , और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है , पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे , सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

मुस्काता सा चहरा इसका , आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी , ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये , इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

*****************

इस अजनबी दुनिया में,

अकेला एक ख्वाब हूँ,

सवालो से खफा,

छोटा सा एक जवाब हूँ,

जो न समझ सके,

उनके लिए '' कौन'',

जो समझ चुके,

उनके लिए एक खुली किताब हूँ .

 ******************

शिकायत है उन्हें कि,
हमें मोहब्बत करना नही आता,
शिकवा तो इस दिल को भी है,
पर इसे शिकायत करना नहीं आता.
*********************

----------------------
न रास्ता सुझाई देता है,
न मंजिल दिखाई देती है,
न लफ्ज़ जुबां पर आते हैं,
न धड़कन सुनाई देती है,
एक अजीब सी कैफियत ने
आन घेरा है मुझे,
की हर सूरत में,
तेरी सूरत दिखाई देती है...
------------------------

यादों की किम्मत वो क्या जाने,
जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,
यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,
यादों के सहारे जिया करते हैं...
--------------------------

खूबसूरत है वो लब जिन पर,
दूसरों के लिए कोई दुआ आ जाए,

खूबसूरत है वो मुस्कान जो,
दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए,

खूबसूरत है वो दिल जो,
किसी के दुख मे शामिल हो जाए,

खूबसूरत है वो जज़बात जो,
दूसरो की भावनाओं को समज जाए,

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
प्यार की मिठास हो जाए,

खूबसूरत है वो बातें जिनमे,
शामिल हों दोस्ती और

प्यार की किस्से, कहानियाँ,
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे,

किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,
खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के,

लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए,
खूबसूरत है वो सोच जिस मैं,

किसी कि सारी ख़ुशी झुप जाए,
खूबसूरत है वो दामन जो,

दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए,
खूबसूरत है वो किसी के,

आँखों के आसूँ जो
किसी के ग़म मे बह जाए..

तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम हसी ना सही
मुसकान बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम हकीकत ना सही
खयाल बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम नज़र ना सही
याद बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम दिल ना सही
धड़कन बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम गज़ल ना सही
सायरी बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम खुशिया ना सही
गम बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम पास ना सही
एहसस बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम कल ना सही
आज बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ...

*********************

आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..

आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..

तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..

नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..

हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..

*********************

प्यार वो हम को,

बेपनाह कर गये,
फिर ज़िनदगीं में हम को,

तन्नहा कर गये,
चाहत थी उनके इश्क में,

फ़नाह होने की,
पर वो लौट कर आने को,

भी मना कर गये.....

मुस्कुराते पलको पे,

सनम चले आते हैं,
आप क्या जानो,

कहाँ से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ किसी ने कहा था,
कि ठहरो हम अभी आते हैं...

भुलाना भी चाहें भुला न सकेंगे
किसी और को दिल में ला न सकेंगे.....

भरोसा अगर वो न चाहें तो उन को
कभी प्यार का हम दिला न सकेंगे.......

वादा निभायेंगे, वो जानते हैं
कसम हम को झूठी खिला न सकेंगे......

क्यों आते नहीं वो है मालूम हम को
नज़र हम से अब वो मिला न सकेंगे......

ज़ोर-ए-नशा-ए-निगाह अब नहीं है
मय वो नज़र से पिला न सकेंगे............

हकीकत से अपनी वो वाकिफ़ हैं खुद ही
कर हम से अब वो गिला न सकेंगे........

कुछ बातें हम से सुना करो,
कुछ बातें हम से किया करो,

मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो,

जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो,

कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो,

जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो,

हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो,

जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।

अधूरापन ख़तम हो जाता है,

तुम्हे पाकर....
दिल का हर तार गुनगुनाता है,

तुम्हे पाकर...

गम जाने किधर जाता है,

तुम्हे पाकर....

सब शिकवे दूर हो जाते है,

तुम्हे पाकर....

जानता हू चंद पलो का खेल है ये..
अफ़सोस नही रहता बाकी,

तुम्हे पाकर..

राह तकती, ये लम्बी पगड़ंड़िया ..
थक कर भी चैन पाती है आंखे,

तुम्हें पाकर..

तमाम मायुसिया छुप जाती है..
जिंदा लाश मानो उठ जाती है,

तुम्हे पाकर..

'तन्हा' मरना जीना सब भूल जाती है,
तुम्हारी बाहों में आकर..

बस तुम्हें पाकर.......

 

इन दियों को हवाओं में रखना
हमको अपनी दुआओं में रखना

वो जो वाली है दो जहानों का
उसको दिल की सदाओं में रखना

कोई तुम से वफ़ा करे न करे
नेक नीयत वफ़ाओं में रखना

हुस्न और इश्क़ उसकी नेमत हैं
तू हुनर इन अदाओं में रखना

हर तमन्ना गुलाब-सी महके
चाँद-तारों की छाओँ में रखना..

बड़ा बेचैन होता जा रहा हूं,
न जाने क्यूं नहीं लिख पा रहा हूं

तुम्हे ये भी लिखूं वो भी बताऊं,
मगर अल्फ़ाज़ ढूंढे जा रहा हूं

मोहब्बत का यही आ़गाज़ होगा,
जिधर देखूं तुम्ही को पा रहा हूं

कभी सूखी ज़मीं हस्ती थी मेरी,
ज़रा देखो मैं बरसा जा रहा हूं

किसी दिन इत्तेफ़ाकन ही मिलेंगे,
पुराने ख्वाब हैं दोहरा रहा हूं

मुझे आगोश में ले लो हवाओं,
गुलों से बोतलों में जा रहा हूं

शरारत का नया अंदाज़ होगा,
मैं शायद बेवजह घबरा रहा हूं

किसे परवाह है अब मंज़िलों की,
मोहब्बत के सफ़र पर जा रहा हूं

दिलों की नाज़ुकी समझे हैं कब वो,
दिमागों को मगर समझा रहा हूं

शब-ए-फ़ुरकत की बेबस हिचकियों से,
तसल्ली है कि मैं याद आ रहा हूं

मोहब्बत थी कहां हिस्से में ,
गज़ल से यूं ही दिल बहला रहा हूं..

है दिल में ख़वाईश की तुझसे इक मुलाक़ात तो हो,
मुलाक़ात ना हो तो फिर मिलने की कुछ बात तो करो,
मोती की तरह समेट लिया है जिन्हे दिल-ए-सागर मे,
ख़वाब सज़ा के, उन ख्वाबों को रुस्वा ना करो…

बहुत अरमान है की फिर से खिले कोई बहार यहाँ,
ये मालूम भी है की जा कर वक़्त आया है कहाँ,
हवा चलती है तो टूट जाते है ह्रे पत्ते भी तो कई,
तो सूखे फूलों से खिलने की तुम इलत्ज़ा ना करो…

ना ग़म करना तुम, ना उदास होना कभी जुदाई से,
वक़्त क्ट ही जाएगा तुम्हारा मेरी याद-ए-तन्हाई से,
ये दुनिया रूठ जाए हमसे तो भले ही रूठी रहे,
सच मर जाएँगे हम, तुम सनम रूठा ना करो…

लम्हा दर लम्हा बसे रहते हो मेरे ख़यालों मे,
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरे दिल के हर सवालों मे,
लो लग गयी ना हिचकियाँ तुम्हे अब तो कुछ समझो,
कह दो की  मेरे बारे मे इतना सोचा ना करो…

आँख खुलते ही ओझल हो जाते हो तुम,
ख्वाब बन के ऐसे क्यों सताते हो तुम…

गमों को भुलाने का एक सहारा ही सही,
मेरे मुरझाए हुए दिल को बहलाते हो तुम…

दूर तक बह जाते है जज़्बात तन्हा दिल के,
हसरतों के क़दमों से लिपट जाते हो तुम…

शीश महल की तरह लगते हो मुझको तो,
खंडहर हुई खव्हाईशोँ को बसाते हो तुम…

यादों की तरह क़ैद रहना मेरी आँखों मे,
आँसू बन कर पलकों पे चले आते हो तुम…

तुम्हारी अधूरी सी आस मे दिल ज़िँदा तो है
साँस लेने की मुझको वजह दे जाते हो तुम…

ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया…
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया…

सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया…
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी पनाह दे दे,
ख़तम कर ये सिलसिला, अब दर्द हद से बढ़ गया…

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....

हम तो हर बार मोहब्बत से सदा देते हैं
आप सुनते हैं और सुनके भुला देते हैं

ऐसे चुभते हैं तेरी याद के खंजर मुझको
भूल जाऊं जो कभी याद दिला देते हैं

ज़ख्म खाते हैं तेरी शोख नीगाही से बोहोत
खूबसूरत से कई ख्वाब सजा लेते हैं

तोड़ देते हैं हर एक मोड़ पे दील मेरा
आप क्या खूब वफाओं का सिला देते हैं

दोस्ती को कोई उन्वान तो देना होगा
रंग कुछ इस पे मोहब्बत का चढा देते हैं

तल्खी ऐ रंज ऐ मोहब्बत से परीशां होकर
मेरे आंसू तुझे हंसने की दुआ देते हैं

हाथ आता नही कुछ भी तो अंधेरों के सीवा
क्यूँ सरे शाम यूँ ही दील को जला लेते हैं

हम तो हर बार मोहब्बत का गुमा करते हैं
वो हर एक बार मोहब्बत से दगा देते हैं

दम भर को ठहरना मेरी फितरत न समझना
हम जो चलते हैं तो तूफ़ान उठा देते हैं

आपको अपनी मोहब्बत भी नही रास आती
हम तो नफरत को भी आंखों से लगा लेते

हैं.