''हसरत'' ..................

हमने मांगी थी अक्सर दुआए बहुत,
हसरतो को मगर,उम्र दे न सके !
तेरे दामन को भर देते फूलों से हम,
कांटो को पर अलग उनसे कर न सके!
बेखुदी में जिए तो क्या गम है,
कभी ख़ुद को जुदा तुमसे कर न सके!
दर्द की सीप में बंद मोटी मिले,
कतरे उन अश्को के जो गिर न सके!!

जुनू ..

हर गम मेरा उसे याद करता रहा,
और वो मुझे बरबाद करता रहा!
जब हुआ दीदारे जुनू का,
तो बस एक ही सवाल करता रहा!
क्यो किया मेरा खून अहले जुनू में,
मै तो तेरे विचारों को आवाद करता रहा!
कभी मन के अंदर से,
कभी मन के बहार से!
शायद तुम्हे मै नजर ही नही आया,
मै तेरा ही जुनू तुजे आवाज देता रहा!!

उलझन.............

नजर भर के तुमको जो देखा अगर तो

जां मेरी फोकट में चल जायगी ॥
नज़ारे इनायत अगर हो गयी तो
दिल तेरे लाकेट में चल जायगी ॥
कसम से खुदा ने दुजा बनाया अगर ऐसा नूर
दुनिया को उसकी मिटा दूंगा मैं॥
घटाएँ है सम्मुख या जुल्फे लहराती
चाँद छुपा है या घुंघट मुसकाती ॥
खुशबू है कैसी या महक मदमाती
जुगनू है दो दो या आखें बरसाती ॥
उलझन है दो दो समझाने में क्यूं
उलझन से तो यह जगर ही बना है ॥
सूना है सब कुछ उलझन बिना क्यूं
उलझन से तो यह जीवन बना है ॥

एक बात कहूं अगर सुनते हो............

एक बात कहूं अगर सुनते हो,
तुम मुझ को अच्छे लगते हो,
कुछ चंचल से कुछ चुप-चुप से,
कुछ पागल-पागल लगते हो,
है चाहने वाले और बहुत,
पर तुम में है एक बात अलग,
तुम अपने-अपने लगते हो,
एक बात कहूं अगर सुनते हो,
तुम मुझ को अच्छे लगते हो,
ये बात-बात पे खो जाना,
कुछ कहते-कहते रूक जाना,
ये किस उलझन में रहते हो,
क्या बात है मुझ से कह डालो,
एक बात कहूं अगर सुनते हो,
तुम मुझ को अच्छे लगते हो...

तुम बिन जीना ऐसा है..................

तुम बिन जीना ऐसा है,
जहर को पीने जैसा है,
तुम से बिछड़कर जिंदा रहना,
हम से पूछो कैसा है,
मेरा तुम को तकते रहना,
चांद को तकने जैसा है,
तेरा हंसकर बातें करना,
खिलते फूलों जैसा है,
बादल तेरे प्यार का हमदम,
आज तो खुल के बरसा है,
चांद की नजरें झुक जाती हैं,
यार मेरा तो कुछ ऐसा है...

ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे...........

ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे तेरा पता दिया

चंद गुलाब खिले दरम्याँ, साँस-साँस महका दिया

क़तरा-क़तरा पिघलता रहा चाँद आँखों में सारी रात
तेरी हँसी ने जाने ये क्या गुल खिला दिया

ख्वाहिशों की मुंडेर पर पिछली शब कोई परिंदा था
इस दर्द से चहका के भरी नींद से जगा दिया

तेरी राह में काँटे सही मगर मेरे हमसफ़र, कह दो-
तूने मुझे अपना सफर, अपनी मंज़िल, अपना रास्ता दिया........



जुस्तजू किसकी मुझे इस मोड़ पर ले आयी है
अजनबी सी लगती मुझे आज मेरी परछाई है


उनकी मश्रुफी का ज़िक्र भी करे क्यूँ हम
जब रास हमें आयी अपनी ही तन्हाई है


तेरी एक आहट का होता कैसा असर तो जरा देख
हर कली बागः में आज फ़िर से मुस्काई है


इन हवाओं में बिखरी यह कैसी रागिनी है
कानो में गूंजती जैसे कोई शहनाई है

सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ
ये प्यार के दो बोल मैं भी पढ़ कर तो देखूँ
किसी की आँखो की बातों को सुन कर तो देखूँ
किसी के दिल मैं रह कर तो देखूँ
सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ

सुना है बहुत गहराई है इस प्यार मैं
बहुत सच्चाई है इस प्यार मैं
इस प्यार की गहराई मैं डूब कर तो देखूँ
सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ

किसी की धड़कनो को सुन कर तो देखूँ
किसी के केशुओं को सुलझा कर तो देखूँ
किस तरह होतें हैं दो दिल एक
ये राज़ जानकार मैं भी तो देखूँ
सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ

सुना बहुत दर्द भी मिलता है इस प्यार मैं
ये दर्द अपने दिल मैं महसूस कर के तो देखूँ
किस तरह होती है आँखों से बातें
ये बात मैं भी तो कर के देखूँ
सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ

सुना है नीद नही आती, चैन भी उड़ जाता है
अपनी इन नीदों को मैं भी तो उड़ा कर तो देखूँ
तन्हाई ही मिलती है इस प्यार मैं
मैं अपनी इस तन्हाई को सकूँ मैं बदल कर तो देखूँ
सोचता हूँ की ये मोहब्बत मैं भी कर के तो देखूँ.

मोहब्बत तो हमने भी की
पर मेरे महबूब ने मेरे
साथ बहुत बेरूख़ी की
वो इस दिल से दूर गई भी नही
ओर मेरे दिल के क़रीब भी नही
जानती है वो तड़पता हूँ मैं
पर मेरे ज़ख़्मो को वो निहारती भी नही

मैं खड़ा हूँ बीच मझदार मैं
ओर मेरी इस क्स्ती का कोई साहिल भी नही
डूबने वाला हूँ मैं इस दरिया मैं
ओर मुझे उस पार उतरने की अब
कोई चाहत भी नही

दर्द के इस समुद्र मैं जी रहा हूँ मैं
मुझे अब किसी खुशी की आरज़ू भी नही
हँसते हैं कुछ लोग जानकार मेरे
एक तरफ़ा प्यार को
पर मुझे अब इस ज़माने की कोई परवा नही

अभी तो मेरे ज़ख़्मो का दर्द ताज़ा है
ओर मेरी आँखो मैं बरीसों की कमी भी नही
मेरे साथ चलने के लिए मेरी तन्हाई हे काफ़ी है
मुझे किसी ओर के सहारे की अब ज़रूरत भी नही .

मेरे जो ख्वाब थे
हैं वो अधूरे अभी
ना कोई रास्ता है
ना कोई मंज़िल है अभी

मेरी ज़िंदगी जा रही है कहाँ
ना जाना मैने अभी
मैं सितारो के साथ बात करता हूँ
परीदों के साथ उड़ता हूँ अभी

कोई ख़ुसी नही है मेरे दिल को
बस गम का सागर है अभी
मै हर जगह खोजता हूँ उससे
उसका अक्ष दिखता है मुझे
हर जगह अभी

उसके बिना तो ज़िंदगी मेरी पतझड़
का मौसम है
बस काँटो की राहें हैं अभी
उस से से जो कहना था ना कह सका कभी
सोचता हूँ दिल का हर राज़
कह दूं उस से अभी

ना दूर जाने दूं मैं उसे अब कभी
बस दिल की झौंव मैं रख लूँ अभी
गर कहे दो प्यार के बोल मुझ से
तो अपने अखोस मैं भर लूँ अभी.

कभी पास आ गये
कभी दूर हो गये
उन्होने एक बार भी मूड कर ना देखा हमे,
पर हम उन के लिए बेवफ़ा ज़रूर हो गये
क्या ग़लती हुई हम से हम पूछते रहे,
और वोह केहते रहे हम मजबूर हो गये
हम माँगते रहे दुआ उनकी खुशियों की,
वो हमे छोड़ किसी और की आँखों के नूर हो गये
वो सोचते रहे के खुश हैं मे
पर हम टूट कर अंदर तक चकना चूर हो गये
मुझे प्यार करने की मिली इतनी बड़ी सज़ा,
और वो हमे मार कर भी बेक़सूर हो गये .

इश्क़ के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों, कुछ रोज़े मैं भर जाते हैं
ख्वाबों मैं अब कोई नही और हम भी नही
इतने रोए से आए हैं चुप छाप गुज़र जाते हैं
नर्म आवाज़, भोली सी बातें
पेहले बारिश मैं ही, सब रंग उतर जाते हैं
रास्ता रोके ख़री है वही उलझन कब से
कोई पूछे तो कहें क्या के किधर जाते हैं
अब तो हालत है मुसाफ़िर जैसी
ना कोई साथी है ना कोई मंज़िल
अकेले हे ना जाने किस धुन मैं चलते जाते हैं

ज़िंदगी मेरी तो तनहाइयों का घेरा है
इस मैं तो बस उदसियों का बसेरा है

अब तो बस नाम की हे रह गई ज़िंदगी मेरी
इस पर तो अब मौत का हर पल ही पहरा है

अब मेरी परझाई भी मुझसे दूर होती जा रही है
ये दुनिया अब ओर भी अजीब होती जा रही है

मेरे महबूब ना ली मेरी ख़बर कई दिन से
क्या वो भी इस दुनिया की तरह मगरूर होती जा रही है

काश की वो कभी जान पाती की उसके बिन मेरी
ज़िंदगी मौत के ओर नज़दीक होती जा रही है

मेरी ख़ामोश मोहब्बत का
इतना तो सिला दिया होता,
कभी एक नज़र चाहत से
देख ही लिया होता
हम भी तुझे इश्क़-ए-मोहब्बत
से आसना करते,
बस एक बार अपने दिल में
आने तो दिया होता.
किया जाता तुम्हारा बस
हमें हे दिल से खुशी मिलती,
अपनी ज़िंदगी की किताब में
नाम हमारा भी लिख लिया होता.
देख लेते ज़रा घोर से शायद,
तुम्हारे हाथ की लकीरों में
हमारी किस्मत का भी नाम दिया होता.
मेरी ख़ामोश मोहब्बत का
इतना तो सिला दिया होता,

खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे
सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगेहर तरफ़ हर जगह हर इक शरीक-ए-जुर्म है
जो ख़ुद हैं बेपरदा तुम्हे नक़ाब क्या देंगेख़ुद झूमते गिरते हुए जाते हैं महफ़िल से
साक़ी ही हों नशे में तो शराब क्या देंगेजो आँख ही मिला नहीं पाते ज़माने से
पढ़ने को तुम्हे दिल की किताब क्या देंगेदिल में रहते हैं मगर आँख से परदा करें
ऐसे शख़्स किसी को हंसीं ख़्वाब क्या देंगे

 

 

 

 

चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए
ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुएन जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हासिल
लुटा के घर भी चला हूं मै सर उठाये हुएना उसकी ख़ता थी न थी ख़ता मेरी
निकल रहे हैं मगर हम नज़र चुराये हुएलो आज फिर से उसने मेरे दिल को तोड़ा है
उसे भी वक़्त हुआ है मुझे सताये हुएये जो है हुस्न का सदक़ा समझ नहीं आया
मेरी पहलू में भी हैं वो नज़र झुकाये हुएजहां मुहाल था एक पल भी ठहरना यारों
ज़माने बीते वहां हम को युग बिताये हुएअपनी तबाहियों का ग़िला नहीं है हम को
हम आज भी हैं उसकी अज़्मतें बचाये हुए

 

 

 

 

 

 

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरानाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं ग़म
टूटा जो दिल ये मेरा तो मैखाना बिखराजो था खुदा वो कितना है मायूस देखो
वो बिखरी मस्जिद ये बुतखाना बिखराकिस सिम्त जाऊं ले कर मै ग़म-ए-दिल
बिखरा है हर अपना, हर बेगाना बिखरा

 

 

 

 

प्यार रिश्ता नही जो निभाऊ,
यह जिंदगी है जीने के लिए...
भूलती हो कैसे जो याद आऊ,
साथ हूँ सदा तुझे हँसाने के लिए

मेरा रास्ता क्यों देखती हो,
ना मिलूंगा इन धूमिल राहों मे...
दिल मे झाँक जो गुहार लगाओ,
मिल जाऊ गले लगाने के लिए

तेरे आँसू नही हैं ये,
क़यामत के दरबान हैं...
एक् बार भी ना मरूँगा,
तुझे रुलाने के लिए

मैं सांस नही लेता,
तेरी खुशबू जिला देती है...
काफी है दामन छूट जाना,
मुझे तड्पाने के लिए

इंतज़ार न कर रात-दिन,
तुझ बिन न रह पाउँगा...
ना कह जुदा होता हूँ मैं,
तुम्हे आजमाने के लिए

*****************

इस अजनबी दुनिया में,

अकेला एक ख्वाब हूँ,

सवालो से खफा,

छोटा सा एक जवाब हूँ,

जो न समझ सके,

उनके लिए '' कौन'',

जो समझ चुके,

उनके लिए एक खुली किताब हूँ .

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शिकायत है उन्हें कि,
हमें मोहब्बत करना नही आता,
शिकवा तो इस दिल को भी है,
पर इसे शिकायत करना नहीं आता.
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न रास्ता सुझाई देता है,
न मंजिल दिखाई देती है,
न लफ्ज़ जुबां पर आते हैं,
न धड़कन सुनाई देती है,
एक अजीब सी कैफियत ने
आन घेरा है मुझे,
की हर सूरत में,
तेरी सूरत दिखाई देती है...
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यादों की किम्मत वो क्या जाने,
जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,
यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,
यादों के सहारे जिया करते हैं...
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खूबसूरत है वो लब जिन पर,
दूसरों के लिए कोई दुआ आ जाए,

खूबसूरत है वो मुस्कान जो,
दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए,

खूबसूरत है वो दिल जो,
किसी के दुख मे शामिल हो जाए,

खूबसूरत है वो जज़बात जो,
दूसरो की भावनाओं को समज जाए,

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
प्यार की मिठास हो जाए,

खूबसूरत है वो बातें जिनमे,
शामिल हों दोस्ती और

प्यार की किस्से, कहानियाँ,
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे,

किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,
खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के,

लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए,
खूबसूरत है वो सोच जिस मैं,

किसी कि सारी ख़ुशी झुप जाए,
खूबसूरत है वो दामन जो,

दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए,
खूबसूरत है वो किसी के,

आँखों के आसूँ जो
किसी के ग़म मे बह जाए..

तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम हसी ना सही
मुसकान बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम हकीकत ना सही
खयाल बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम नज़र ना सही
याद बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम दिल ना सही
धड़कन बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम गज़ल ना सही
सायरी बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम खुशिया ना सही
गम बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम पास ना सही
एहसस बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम कल ना सही
आज बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ...

*********************

आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..

आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..

तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..

नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..

हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..

*********************

प्यार वो हम को,

बेपनाह कर गये,
फिर ज़िनदगीं में हम को,

तन्नहा कर गये,
चाहत थी उनके इश्क में,

फ़नाह होने की,
पर वो लौट कर आने को,

भी मना कर गये.....

मुस्कुराते पलको पे,

सनम चले आते हैं,
आप क्या जानो,

कहाँ से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ किसी ने कहा था,
कि ठहरो हम अभी आते हैं...

भुलाना भी चाहें भुला न सकेंगे
किसी और को दिल में ला न सकेंगे.....

भरोसा अगर वो न चाहें तो उन को
कभी प्यार का हम दिला न सकेंगे.......

वादा निभायेंगे, वो जानते हैं
कसम हम को झूठी खिला न सकेंगे......

क्यों आते नहीं वो है मालूम हम को
नज़र हम से अब वो मिला न सकेंगे......

ज़ोर-ए-नशा-ए-निगाह अब नहीं है
मय वो नज़र से पिला न सकेंगे............

हकीकत से अपनी वो वाकिफ़ हैं खुद ही
कर हम से अब वो गिला न सकेंगे........

कुछ बातें हम से सुना करो,
कुछ बातें हम से किया करो,

मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो,

जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो,

कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो,

जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो,

हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो,

जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।

अधूरापन ख़तम हो जाता है,

तुम्हे पाकर....
दिल का हर तार गुनगुनाता है,

तुम्हे पाकर...

गम जाने किधर जाता है,

तुम्हे पाकर....

सब शिकवे दूर हो जाते है,

तुम्हे पाकर....

जानता हू चंद पलो का खेल है ये..
अफ़सोस नही रहता बाकी,

तुम्हे पाकर..

राह तकती, ये लम्बी पगड़ंड़िया ..
थक कर भी चैन पाती है आंखे,

तुम्हें पाकर..

तमाम मायुसिया छुप जाती है..
जिंदा लाश मानो उठ जाती है,

तुम्हे पाकर..

'तन्हा' मरना जीना सब भूल जाती है,
तुम्हारी बाहों में आकर..

बस तुम्हें पाकर.......

 

इन दियों को हवाओं में रखना
हमको अपनी दुआओं में रखना

वो जो वाली है दो जहानों का
उसको दिल की सदाओं में रखना

कोई तुम से वफ़ा करे न करे
नेक नीयत वफ़ाओं में रखना

हुस्न और इश्क़ उसकी नेमत हैं
तू हुनर इन अदाओं में रखना

हर तमन्ना गुलाब-सी महके
चाँद-तारों की छाओँ में रखना..

बड़ा बेचैन होता जा रहा हूं,
न जाने क्यूं नहीं लिख पा रहा हूं

तुम्हे ये भी लिखूं वो भी बताऊं,
मगर अल्फ़ाज़ ढूंढे जा रहा हूं

मोहब्बत का यही आ़गाज़ होगा,
जिधर देखूं तुम्ही को पा रहा हूं

कभी सूखी ज़मीं हस्ती थी मेरी,
ज़रा देखो मैं बरसा जा रहा हूं

किसी दिन इत्तेफ़ाकन ही मिलेंगे,
पुराने ख्वाब हैं दोहरा रहा हूं

मुझे आगोश में ले लो हवाओं,
गुलों से बोतलों में जा रहा हूं

शरारत का नया अंदाज़ होगा,
मैं शायद बेवजह घबरा रहा हूं

किसे परवाह है अब मंज़िलों की,
मोहब्बत के सफ़र पर जा रहा हूं

दिलों की नाज़ुकी समझे हैं कब वो,
दिमागों को मगर समझा रहा हूं

शब-ए-फ़ुरकत की बेबस हिचकियों से,
तसल्ली है कि मैं याद आ रहा हूं

मोहब्बत थी कहां हिस्से में ,
गज़ल से यूं ही दिल बहला रहा हूं..

है दिल में ख़वाईश की तुझसे इक मुलाक़ात तो हो,
मुलाक़ात ना हो तो फिर मिलने की कुछ बात तो करो,
मोती की तरह समेट लिया है जिन्हे दिल-ए-सागर मे,
ख़वाब सज़ा के, उन ख्वाबों को रुस्वा ना करो…

बहुत अरमान है की फिर से खिले कोई बहार यहाँ,
ये मालूम भी है की जा कर वक़्त आया है कहाँ,
हवा चलती है तो टूट जाते है ह्रे पत्ते भी तो कई,
तो सूखे फूलों से खिलने की तुम इलत्ज़ा ना करो…

ना ग़म करना तुम, ना उदास होना कभी जुदाई से,
वक़्त क्ट ही जाएगा तुम्हारा मेरी याद-ए-तन्हाई से,
ये दुनिया रूठ जाए हमसे तो भले ही रूठी रहे,
सच मर जाएँगे हम, तुम सनम रूठा ना करो…

लम्हा दर लम्हा बसे रहते हो मेरे ख़यालों मे,
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरे दिल के हर सवालों मे,
लो लग गयी ना हिचकियाँ तुम्हे अब तो कुछ समझो,
कह दो की  मेरे बारे मे इतना सोचा ना करो…

आँख खुलते ही ओझल हो जाते हो तुम,
ख्वाब बन के ऐसे क्यों सताते हो तुम…

गमों को भुलाने का एक सहारा ही सही,
मेरे मुरझाए हुए दिल को बहलाते हो तुम…

दूर तक बह जाते है जज़्बात तन्हा दिल के,
हसरतों के क़दमों से लिपट जाते हो तुम…

शीश महल की तरह लगते हो मुझको तो,
खंडहर हुई खव्हाईशोँ को बसाते हो तुम…

यादों की तरह क़ैद रहना मेरी आँखों मे,
आँसू बन कर पलकों पे चले आते हो तुम…

तुम्हारी अधूरी सी आस मे दिल ज़िँदा तो है
साँस लेने की मुझको वजह दे जाते हो तुम…

ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया…
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया…

सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया…
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी पनाह दे दे,
ख़तम कर ये सिलसिला, अब दर्द हद से बढ़ गया…

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....

हम तो हर बार मोहब्बत से सदा देते हैं
आप सुनते हैं और सुनके भुला देते हैं

ऐसे चुभते हैं तेरी याद के खंजर मुझको
भूल जाऊं जो कभी याद दिला देते हैं

ज़ख्म खाते हैं तेरी शोख नीगाही से बोहोत
खूबसूरत से कई ख्वाब सजा लेते हैं

तोड़ देते हैं हर एक मोड़ पे दील मेरा
आप क्या खूब वफाओं का सिला देते हैं

दोस्ती को कोई उन्वान तो देना होगा
रंग कुछ इस पे मोहब्बत का चढा देते हैं

तल्खी ऐ रंज ऐ मोहब्बत से परीशां होकर
मेरे आंसू तुझे हंसने की दुआ देते हैं

हाथ आता नही कुछ भी तो अंधेरों के सीवा
क्यूँ सरे शाम यूँ ही दील को जला लेते हैं

हम तो हर बार मोहब्बत का गुमा करते हैं
वो हर एक बार मोहब्बत से दगा देते हैं

दम भर को ठहरना मेरी फितरत न समझना
हम जो चलते हैं तो तूफ़ान उठा देते हैं

आपको अपनी मोहब्बत भी नही रास आती
हम तो नफरत को भी आंखों से लगा लेते

हैं.