Hindi Sayri

मेरी मोहब्बत मेरे दिल की गफलत थी
मैं बेसबब ही उम्र भर तुझे कोसता रहा

आखिर ये बेवफाई और वफ़ा क्या है
तेरे जाने के बाद देर तक सोचता रहा

मैं इसे किस्मत कहूँ या बदकिस्मती अपनी
तुझे पाने के बाद भी तुझे खोजता रहा


सुना था वो मेरे दर्द मे ही छुपा है कहीं
उसे ढूँढने को मैं अपने ज़ख्म नोचता रहा

जब मिटा के शहर गया होगा
एक लम्हा ठहर गया होगा

है, वो हैवान ये माना लेकिन
उसकी जानिब भी डर गया होगा

तेरे कुचे से खाली हाथ लिए
वो मुसाफिर किधर गया होगा

ज़रा सी छाँव को वो जलता बदन
शाम होते ही घर गया होगा

नयी कलियाँ जो खिल रही फिर से
ज़ख़्म ए दिल कोई भर गया होगा

वो मेरे नक्श-ओ-निशा मिटने आया था
और मैं ज़मी में ख़ुद को छुपा आया था

तेरे सितम का निशान लाया साथ अपने
शब्'ऐ फिराक का एक लम्हा चुरा आया था

किसी नज़र को तो मेरी तलाश नही थी
सो मैं ख़ुद से ही नज़र बचा आया था

वो बस अपने फ़राह के लिए आते थे मिलने
उन्हें अपना समझ मैं ज़ख्म दिखा आया था

दिल के टूटते ही अचानक मैं नादां से दाना हुआ
इस तजुर्बे की क्या कीमत चुका आया था

अफ़सोस नही के मेरा दुश्मन मुझसे जीत गया
मलाल यह है की मेरे महबूब ने उसे जिताया था

नम निगाह देख के हमदर्दी ना जाता
ये तो मैं चश्म का भोझ गिरा आया था

सुपुरत'ऐ खाक कर के ख्वाबों को आपने
मैं वहां की घांस भी जला आया था

तेरे जाने के बाद भी तुझे छोड़ ना पाया
सम्शन से मैं तेरी राख़ चुरा आया था

वो मांगते थे इश्क की गवाही मुझसे
मैं तो कबका जुबां दफ़न कर आया था

जाते जाते भी तेरी याद ना गई दिल से
तो मैं अब ख़ुद को ही भुला आया था

बाद'ओ जाम ही मेरे फाजिल'ऐ उमर हुए
तो मैं मैकदे में ही घर बसा आया था

कतरा बन के अटका हूँ तेरी पलकों पर
देख ना नज़र झुका के गिर जाऊंगा

जिक्र यह आज पीरों में है

कुछ तो लिखा लकीरों है

यूँ ही नही है दिल घायल हुआ

बात तो कुछ नज़र क तीरों में है

राह'ऐ सुकून अब खोजे कहाँ

येही फिक्र अब फ़कीरों में है

तेरा हर लफ्ज़ है मुकमल ग़ज़ल

तुझ सी बात न कई मीरों में है

उन के मुस्कुराने की सी अदा

यकीनन न सौ हीरों में है

माह अब खुशी से मर जाऊंगा मैं

मेरा नाम उनके तक्सीरों में है

 

सच्चे शब्दों में सच के अहसास लिखेंगे ..


वक्त पढे जिसको कुछ इतना खास लिखेंगे,


गीत गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,


हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे..

 

वो मेरा ही काम करेंगे
जब मुझको बदनाम करेंगे

अपने ऐब छुपाने को वो
मेरे क़िस्से आम करेंगे

क्यों अपने सर तोहमत लूं मैं
वो होगा जो राम करेंगे

दीवारों पर खून छिड़क कर
हाक़िम अपना नाम करेंगे

हैं जिनके किरदार अधूरे
दूने अपने दाम करेंगे

अपनी नींदें पूरी करके
मेरी नींद हराम करेंगे

जिस दिन मेरी प्यास मरेगी
मेरे हवाले जाम करेंगे

कल कर लेंगे कल कर लेंगे
यूँ हम उम्र तमाम करेंगे

सोच-सोच कर उम्र बिता दी
कोई अच्छा काम करेंगे

कोई अच्छा काम करेंगे
खुदको फिर बदनाम करेंगे !!

जो पत्थर तुमने मारा था मुझे नादान की तरह
उसी पत्थर को पूजा है किसी भगवान की तरह

तुम्हारी इन उँगलियों की छुअन मौजूद है उस पर
उसे महसूस करता हूँ किसी अहसान की तरह

उसी पत्थर में मिलती है तुम्हारी हर झलक मुझको
उसी से बात करता हूँ किसी इनसान की तरह

कभी जब डूबता हूँ मैं उदासी के समंदर में
तुम्हारी याद आती है किसी तूफ़ान की तरह

मेरी किस्मत में है दोस्त तुम्हारे हाथ का पत्थर
भूल जाना नहीं मुझे किसी अंजान की तरह

एक वादा.........

A boy and a girl loved each other,
Unfortunately the boy died. . . .

After death he said to the girl


"एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे,
तू मिलेगी मुझे हर दरवाज़े के पीछे,
पर तू मुझे रुसवा कर गई,
एक तू ही न थी मेरे जनाजे के पीछे".

 

इतने में लड़की की आवाज़ आई,
She said . . . . .

एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे,
मैं मिलूंगी तुझे हर दरवाज़े के पीछे,
पर तुने ही मूड़ के न देखा,
एक और जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे......

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लौट जाती है दुनिया गम हमारा देखकर,
जैसे लौट जाती हैं लेहरें किनारा देखकर,
तू कान्धा न देना मेरे जानाज़े को ऐ दोस्त,
कही फ़िर जिंदा न हो जाऊं तेरा सहारा देख कर.

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बनो सहारा बे-सहारों के लिए,
बनो किनारा बे-किनारों के लिए,
जो जीये अपने लिए तोः क्या जीये,
जी सको तोः जियो हजारो के लिए.

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हमको बताया था उन्होंने एक बार,
की उनको सिर्फ़ उजाले ही भाते हैं,
कहीं वो डर न जायें अंधेरे में,
इस लिए रौशनी के लिए हम दिल जलाते हैं,

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लबो पे आज उनका नाम आ गया,
प्यासे के हाथ में जैसे जाम आ गया,
डोले कदम तो गिरा उनकी बाहों में जाकर,
आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया.

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बड़ी आसानी से दिल लगाये जाते हैं,
पर बड़ी मुश्किल से वादे निभाए जाते हैं,
ले जाती है मोहब्बत उन राहो पर,
जहा दिए नही दिल जलाए जाते हैं.

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भुला कर हमें वो खुश रह पाएंगे,
साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे,
दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द न देना,
हम तो सह गए पर वोह टूट जायेंगे .

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येः आईने से अकेले में गुफ्तगू क्या है,
जो मैं नहीं तो फिर यह तेरे रूबरू क्या है,
इसी उम्मीद पे काटी है ज़िन्दगी मैंने,
वोः काश पूछते मुझसे के आरज़ू क्या है.

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ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया...
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया...

सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया...
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी पनाह दे दे,
ख़तम कर ये सिलसिला, अब दर्द हद से बढ़ गया...

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जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है ॥
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है॥
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है ॥

 **

Kabhi na kabhi to baharon ke phool murjha jayenge,
Bhule bhi kabhie hum tumhe yaad aayenge,
Ehsaas hoga tumhe meri dosti ka jab hum bahot dur chale jayenge

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Maana ki aaj hamare saath koi dildaar nai,
Lekin ye mat samajhna ki hamein kisi se pyar nahi,
Kismat ne sab kuch diya hamein sirf diya hamara woh yaar nahi

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Maine jo socha wo kabhi paya nahi,
Chahakar bhi main usko bhul paya nahi,
Chahata to tha main usko apnana,
Par maine usko kabhi ye bataya nahi.

**

Kitni Khushi milti hai tujhko, dil mera todhkar
Lekin ye dil bhi to hai, teri hi amanat
Dekhein kab tak tu khush rahta hai
Apni hi cheez ko todhkar

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Jo mila usse chaha na sake,
Jise chaha usse paa na sake,
Ye samajhlo dil tootne ka khel hai,
Kisi ka toda aur apna bacha na sake.

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Kab Toot jaye kasam hi to hai,
Kab badal jaye nazar hi to hai,
Tum mere Saath ki aadat na dalna,
Kab choot jaye zindagi to hai.

**

Raste par mat baitho hawa tang karegi,
Gujare hue lamhon ki saja tang karegi,
Kisi ko mat lao dil ke itne kareeb,
Uske jane par uski har ek ada tang karegi..

**

“Bhoolneki tujhe najane hum kitne vade karte hain,
Kaise bhoolu tujhe,yeh sochker tume yaad karte hain,
Jab bhi hota hai zikr zamane mein pyar aur wafaa ki,
To tumhe bewafa ke bahane yaad karte hain ”

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Yaad mein teri aansoo bahate hai kuy
Har saans ke sath tujhe yaad karte hai kuy
Mout to sach hai aani hai
Lekin teri judayi mein har roz marte hai kuy

**

Khwaab tha usse khush rakhne ka,
Jab aankh khuli to khwaab tuta,
Shyad mera chehra uska khwaab nahi hai,
Par khush hun kyunki wo khush hai.

**

Daag ansuon se dhoye hain,
Jab bhi tanha huye hain roye hain,
Dil mein kyonkar na uge yaad teri,
Dil mein tere hi khawab boye hain.

**

Raste khud hi tabahi ke nikale hamne,
Kar diya dil kissi patthar ke hawale hamne,
Hamko malum hai kya shai hai mohabbat logon,
Apne ghar phook ke dekhe hain ujale hamne.

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Wo ruthe is kadar ki manaya na gaya,
Dur itne ho gaye ki pass bulaya na gaya,
Dil to dil tha samundar ka sahil nahi,
Likh diya naam to fir mitaya na gaya.

यादों ने आज फिर मेरा दामन भिगो दिया
दिल का कुसूर था मगर आँखों ने रो दिया

मुझको नसीब था कभी सोहबत का सिलसिला
लेकिन मेरा नसीब कि उसको भी खो दिया

उनकी निगाह की कभी बारिश जो हो गई
मन में जमी जो मैल थी उसको भी धो दिया

गुल की तलाश में कभी गुलशन में जब गया
खुशबू ने मेरे पाँव में काँटा चुभो दिया

सोचा कि नाव है तो फिर मँझधार कुछ नहीं
लेकिन समय की मार ने मुझको डुबो दिया

दोस्तों वफ़ा के नाम पर अरमाँ जो लुट गए
मुझको सुकून है मगर लोगों ने रो दिया

लहू से ♥ पे जो खीचा था नक्शा कैसे मिटादु !
तू ही बता मैं तुझको अपने ♥ से कैसे भुलादु !!

मेरे हस्ती को तो बस आस थी तेरे वजूद की !
मेरे हस्ती का जो हशी है उसे कैसे भुला दु !!

मेरे तनहाई में जो साथ मेरा छोर न पाया !
सब से फुरसत का जो हशी है उसे कैसे भुलादु !!

जिनकी तलाश में मेरा जीवन गुजर गया !
उस दोस्त को पाकर उसे कैसे भुला दु !!

वही तो याद थी सदा वही याद है सदा !
जो याद रहेगी सदा उसे कैसे भुला दु !!

चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया
पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया

जागा रहा तो मैंने नए काम कर लिए
ऐ नींद आज तेरे न आने का शुक्रिया

सूखा पुराना जख्म नए को जगह मिली
स्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया

आती न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियाँ
दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया

आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया

अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया

गम मिलते हैं तो और निखरती है शायरी
यह बात है तो सारे जमाने का शुक्रिया

अब मुझको आ गए हैं मनाने के सब हुनर
यूँ मुझसे `’ रूठ के जाने का शुक्रिया

कोई आँसू बहाता है, कोई खुशियाँ मनाता है
ये सारा खेल उसका है, वही सब को नचाता है।

बहुत से ख़्वाब लेकर के, वो आया इस शहर में था
मगर दो जून की रोटी, बमुश्किल ही जुटाता है।

घड़ी संकट की हो या फिर कोई मुश्किल बला भी हो
ये मन भी खूब है, रह रह के, उम्मीदें बँधाता है।

मेरी दुनिया में है कुछ इस तरह से उसका आना भी
घटा सावन की या खुशबू का झोंका जैसे आता है।

बहे कोई हवा पर उसने जो सीखा बुज़ुर्गों से
उन्हीं रस्मों रिवाजों, को अभी तक वो निभाता है।

किसी को ताज मिलता है, किसी को मौत मिलती है
ये देखें, प्यार में, मेरा मुकद्दर क्या दिखाता है।

ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए!

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया !
कही दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !
जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!
चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !
या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!
के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !
ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!
रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !
करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!
समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !

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इस अजनबी दुनिया में,

अकेला एक ख्वाब हूँ,

सवालो से खफा,

छोटा सा एक जवाब हूँ,

जो न समझ सके,

उनके लिए '' कौन'',

जो समझ चुके,

उनके लिए एक खुली किताब हूँ .

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शिकायत है उन्हें कि,
हमें मोहब्बत करना नही आता,
शिकवा तो इस दिल को भी है,
पर इसे शिकायत करना नहीं आता.
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न रास्ता सुझाई देता है,
न मंजिल दिखाई देती है,
न लफ्ज़ जुबां पर आते हैं,
न धड़कन सुनाई देती है,
एक अजीब सी कैफियत ने
आन घेरा है मुझे,
की हर सूरत में,
तेरी सूरत दिखाई देती है...
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यादों की किम्मत वो क्या जाने,
जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,
यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,
यादों के सहारे जिया करते हैं...
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खूबसूरत है वो लब जिन पर,
दूसरों के लिए कोई दुआ आ जाए,

खूबसूरत है वो मुस्कान जो,
दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए,

खूबसूरत है वो दिल जो,
किसी के दुख मे शामिल हो जाए,

खूबसूरत है वो जज़बात जो,
दूसरो की भावनाओं को समज जाए,

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे,
प्यार की मिठास हो जाए,

खूबसूरत है वो बातें जिनमे,
शामिल हों दोस्ती और

प्यार की किस्से, कहानियाँ,
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे,

किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,
खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के,

लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए,
खूबसूरत है वो सोच जिस मैं,

किसी कि सारी ख़ुशी झुप जाए,
खूबसूरत है वो दामन जो,

दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए,
खूबसूरत है वो किसी के,

आँखों के आसूँ जो
किसी के ग़म मे बह जाए..

तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम हसी ना सही
मुसकान बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम हकीकत ना सही
खयाल बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम नज़र ना सही
याद बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम दिल ना सही
धड़कन बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम गज़ल ना सही
सायरी बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम खुशिया ना सही
गम बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम पास ना सही
एहसस बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

तुम कल ना सही
आज बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ...

*********************

आंख जब भी बंद किया करते हैं..
सामने आप हुआ करते हैं..

आप जैसा ही मुझे लगता है..
ख्वाब मे जिससे मिला करते हैं..

तू अगर छोडके जाता है तो क्या..
हादसे रोज़ हुआ करते हैं..

नाम उनका ना, कोई उनका पता..
लोग जो दिलमे रहा करते हैं..

हमने “राही” का चलन सीखा है..
हम अकेले ही चला करते हैं..

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प्यार वो हम को,

बेपनाह कर गये,
फिर ज़िनदगीं में हम को,

तन्नहा कर गये,
चाहत थी उनके इश्क में,

फ़नाह होने की,
पर वो लौट कर आने को,

भी मना कर गये.....

मुस्कुराते पलको पे,

सनम चले आते हैं,
आप क्या जानो,

कहाँ से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ किसी ने कहा था,
कि ठहरो हम अभी आते हैं...

भुलाना भी चाहें भुला न सकेंगे
किसी और को दिल में ला न सकेंगे.....

भरोसा अगर वो न चाहें तो उन को
कभी प्यार का हम दिला न सकेंगे.......

वादा निभायेंगे, वो जानते हैं
कसम हम को झूठी खिला न सकेंगे......

क्यों आते नहीं वो है मालूम हम को
नज़र हम से अब वो मिला न सकेंगे......

ज़ोर-ए-नशा-ए-निगाह अब नहीं है
मय वो नज़र से पिला न सकेंगे............

हकीकत से अपनी वो वाकिफ़ हैं खुद ही
कर हम से अब वो गिला न सकेंगे........

कुछ बातें हम से सुना करो,
कुछ बातें हम से किया करो,

मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो,

जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो,

कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो,

जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो,

हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो,

जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।

अधूरापन ख़तम हो जाता है,

तुम्हे पाकर....
दिल का हर तार गुनगुनाता है,

तुम्हे पाकर...

गम जाने किधर जाता है,

तुम्हे पाकर....

सब शिकवे दूर हो जाते है,

तुम्हे पाकर....

जानता हू चंद पलो का खेल है ये..
अफ़सोस नही रहता बाकी,

तुम्हे पाकर..

राह तकती, ये लम्बी पगड़ंड़िया ..
थक कर भी चैन पाती है आंखे,

तुम्हें पाकर..

तमाम मायुसिया छुप जाती है..
जिंदा लाश मानो उठ जाती है,

तुम्हे पाकर..

'तन्हा' मरना जीना सब भूल जाती है,
तुम्हारी बाहों में आकर..

बस तुम्हें पाकर.......

 

इन दियों को हवाओं में रखना
हमको अपनी दुआओं में रखना

वो जो वाली है दो जहानों का
उसको दिल की सदाओं में रखना

कोई तुम से वफ़ा करे न करे
नेक नीयत वफ़ाओं में रखना

हुस्न और इश्क़ उसकी नेमत हैं
तू हुनर इन अदाओं में रखना

हर तमन्ना गुलाब-सी महके
चाँद-तारों की छाओँ में रखना..

बड़ा बेचैन होता जा रहा हूं,
न जाने क्यूं नहीं लिख पा रहा हूं

तुम्हे ये भी लिखूं वो भी बताऊं,
मगर अल्फ़ाज़ ढूंढे जा रहा हूं

मोहब्बत का यही आ़गाज़ होगा,
जिधर देखूं तुम्ही को पा रहा हूं

कभी सूखी ज़मीं हस्ती थी मेरी,
ज़रा देखो मैं बरसा जा रहा हूं

किसी दिन इत्तेफ़ाकन ही मिलेंगे,
पुराने ख्वाब हैं दोहरा रहा हूं

मुझे आगोश में ले लो हवाओं,
गुलों से बोतलों में जा रहा हूं

शरारत का नया अंदाज़ होगा,
मैं शायद बेवजह घबरा रहा हूं

किसे परवाह है अब मंज़िलों की,
मोहब्बत के सफ़र पर जा रहा हूं

दिलों की नाज़ुकी समझे हैं कब वो,
दिमागों को मगर समझा रहा हूं

शब-ए-फ़ुरकत की बेबस हिचकियों से,
तसल्ली है कि मैं याद आ रहा हूं

मोहब्बत थी कहां हिस्से में ,
गज़ल से यूं ही दिल बहला रहा हूं..

है दिल में ख़वाईश की तुझसे इक मुलाक़ात तो हो,
मुलाक़ात ना हो तो फिर मिलने की कुछ बात तो करो,
मोती की तरह समेट लिया है जिन्हे दिल-ए-सागर मे,
ख़वाब सज़ा के, उन ख्वाबों को रुस्वा ना करो…

बहुत अरमान है की फिर से खिले कोई बहार यहाँ,
ये मालूम भी है की जा कर वक़्त आया है कहाँ,
हवा चलती है तो टूट जाते है ह्रे पत्ते भी तो कई,
तो सूखे फूलों से खिलने की तुम इलत्ज़ा ना करो…

ना ग़म करना तुम, ना उदास होना कभी जुदाई से,
वक़्त क्ट ही जाएगा तुम्हारा मेरी याद-ए-तन्हाई से,
ये दुनिया रूठ जाए हमसे तो भले ही रूठी रहे,
सच मर जाएँगे हम, तुम सनम रूठा ना करो…

लम्हा दर लम्हा बसे रहते हो मेरे ख़यालों मे,
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरे दिल के हर सवालों मे,
लो लग गयी ना हिचकियाँ तुम्हे अब तो कुछ समझो,
कह दो की  मेरे बारे मे इतना सोचा ना करो…

आँख खुलते ही ओझल हो जाते हो तुम,
ख्वाब बन के ऐसे क्यों सताते हो तुम…

गमों को भुलाने का एक सहारा ही सही,
मेरे मुरझाए हुए दिल को बहलाते हो तुम…

दूर तक बह जाते है जज़्बात तन्हा दिल के,
हसरतों के क़दमों से लिपट जाते हो तुम…

शीश महल की तरह लगते हो मुझको तो,
खंडहर हुई खव्हाईशोँ को बसाते हो तुम…

यादों की तरह क़ैद रहना मेरी आँखों मे,
आँसू बन कर पलकों पे चले आते हो तुम…

तुम्हारी अधूरी सी आस मे दिल ज़िँदा तो है
साँस लेने की मुझको वजह दे जाते हो तुम…

ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया…
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया…

सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया…
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी पनाह दे दे,
ख़तम कर ये सिलसिला, अब दर्द हद से बढ़ गया…

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....

हम तो हर बार मोहब्बत से सदा देते हैं
आप सुनते हैं और सुनके भुला देते हैं

ऐसे चुभते हैं तेरी याद के खंजर मुझको
भूल जाऊं जो कभी याद दिला देते हैं

ज़ख्म खाते हैं तेरी शोख नीगाही से बोहोत
खूबसूरत से कई ख्वाब सजा लेते हैं

तोड़ देते हैं हर एक मोड़ पे दील मेरा
आप क्या खूब वफाओं का सिला देते हैं

दोस्ती को कोई उन्वान तो देना होगा
रंग कुछ इस पे मोहब्बत का चढा देते हैं

तल्खी ऐ रंज ऐ मोहब्बत से परीशां होकर
मेरे आंसू तुझे हंसने की दुआ देते हैं

हाथ आता नही कुछ भी तो अंधेरों के सीवा
क्यूँ सरे शाम यूँ ही दील को जला लेते हैं

हम तो हर बार मोहब्बत का गुमा करते हैं
वो हर एक बार मोहब्बत से दगा देते हैं

दम भर को ठहरना मेरी फितरत न समझना
हम जो चलते हैं तो तूफ़ान उठा देते हैं

आपको अपनी मोहब्बत भी नही रास आती
हम तो नफरत को भी आंखों से लगा लेते

हैं.